नमाज़
प्रत्येक दिन पाँच बारा निर्धरित विधि से निर्धरित समय निर्धारित मात्रा में हर बालिग और होश मन्द को मर्द और औरत पर नमाज अद करना अनिवार्य है|हर नमाज कुछ निर्धारित अंश पुरुष के लिये सामूहिक तौर पर मस्जिद में(जमात से,इमाम के पीछे)मस्जिद में अदा कर ने पर जोर दिय गया है ताकि मेल जोल और अनुशासन का अतिरिक्त लाभ भी व्यक्ति व् समाज को बराबर मिलता रहे
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कॉपी राईट बाई "इस्लाम सब के लिए"
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इस्लाम प्रेम और क्षमा का धर्म...