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    • शहादाह:  इस का शाब्दिक अर्थ है गवाही देना। इस्लाम में इसका अर्थ इस अरबी घोषणा से हैःREAD MORE
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    • नमाज़:  प्रत्येक दिन पाँच बारा निर्धरित विधि से निर्धरित समय निर्धारित मात्रा में हर बालिग और होश मन्द को मर्द और औरत पर नमाज अद करना अनिवार्य है|हर नमाज कुछ निर्धारित अंश पुरुष के लिये सामूहिक...READ MORE
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    • रोज़ा:  ईस्लाम क चौथा स्तम्भ 'रोजा' है। इस्लमी कैलेन्डर के नवे मास रमाजान में हर बालिग, होशमंद, स्वस्थ, मुसलमान मर्द और औरत पर महीने भर लगातार रोजा रखना अनिवार्य किया गया हैREAD MORE
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    • हज:  हज उस धार्मिक तीर्थ यात्रा का नाम है जो इस्लामी कैलेण्डर के १२वें महीने में मक्का के शहर में जाकर की जाती है।READ MORE
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    • ज़कात:  र्इश्वर ने प्रत्येक मुसलमानों धनवान व्यक्ति के लिए अनिवार्य किया हैं कि यदि उसके पास कम से कम साढ़े बावन तोला चॉदी हो और उसे रखे हुए पूरा एक वर्ष बीत जाए, तो वह उसमें से चालीसवॉ भाग अपने...READ MORE

इस्लाम का अध्यन क्यों करें

वेदो ने भी हज़रत...

मुहम्मद सल्ल0 अरब में छटी शताब्दी र्इ0 में पैदा हुए, मगर इससे बहुत पहले उनके आगमन की भविष्यवाणी वेदों में की गर्इ हैं। एक सज्जन से यह बात सुनकर मैने इसकी...

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विद्वानों की नजर में इस्लाम

महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधीइस्लाम, जो हजरत मुहम्मद द्वारा पेश किया गया,पिछले तमाम उद्घाटित धर्मो का अविच्छिन्न तत्व और उन सबका उत्कर्ष बिन्दु हैं, इसलिए इसे हर युग के लोगो के लिए सर्वथा उचित धर्म समझा जा सकता हैं। इस्लाम के इस महत्व की पुष्टि के लिए कुछ तथ्य नीचे दिए जा रहे हैं।

एक यह कि अब कोई आसमानी किताब ऐसी नही हैं जो अपने मूलरूप में मौजूद हो ।..

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इस्लाम जिससे मुझे दिली प्यार है

इस्लाम प्रेम और...

इस्लाम प्रेम और क्षमा का धर्म हैंअंग्रेज़ी के पाठक में कमला दास और मलयालम के पाठकों में माधवी कुट्टी के नाम से जानी जाने वाली मशहूर लेखिका और कवयित्रों ने दिसम्बर १९९९ ई० में इस्लाम कबूल करके अपना नाम सुरैया रख लिया तो केरल के साहित्य, समाज, धर्म और संस्कृति के क्षेत्रों में जैसा तुफान आया, वैसा वहा के इतिहास में किसी एक व्यक्ति ...

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गलतफहमियों का निवारण

इस्लाम मे हलाल और हराम , पशु-बलि (कुरबानी) और इस्लामइस्लाम की विशिष्टता इस संबंध मे यह हैं कि वह अन्य समाजों के विपरीत, मांसाहार के विषय मे एक निश्चित आचार संहिता (Code of conduct) अपने अनुयायियों को प्रदान करता हैं जिसे इस्लामी विधान (शरीअत) की परिभाषा में ‘हलाल’ (वैद्य) और ‘हराम’ (अवैध) कहा गया हैं। इसकी सीमा का निर्धारण स्वयं अल्लाह ने (कुरआन में) कर दिया हैं तथा इसकी विस्तृत व्याख्या अल्लाह के पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल्ल0) के आदर्श (सुन्नत, सीरत व हदीस) में कर दी गर्इ हैं। जैसा कि पहले लिखा जा चुका है कि अल्लाह (र्इश्वर) की तत्वदर्शिता व ज्ञान अपार, असीम और...

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इस्लाम के बारे में

मुसलमान कौन हैं?  यदि कोर्इ प्रश्न करे कि एक वाक्य मे बताया जाए कि मुसलमान किसे कहते हैं? तो इसका उत्तर यह हैं कि ‘‘ मुसलमान वह हैं जो इस्लाम का पालन करे ‘‘ और ‘’इस्लाम क्या हैं?’’ यह पहले सविस्तार बताया जा चुका हैं।
मुसलमान वह है जो पवित्र कुरआन का माननेवाला, उसके अनुसार कर्म करनेवाला हैं और र्इशदूत (सल्ल0) के आदर्श को अपने लिए मार्गदीप समझता हैं या जिस मार्ग पर आपके उत्तराधिकारी (खुलफा-ए-राशिदीन) और आपके वंशज चले, उसका अनुसरण करता हैं।
नीचे पवित्र कुरआन से भी मुसलमानों के कुछ गुण दर्शाए जा रहे हैं। जिसने अपनी...

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होली क़ुरान

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मेरी इस्लाम यात्रा

जनाब अब्दुल्ला अडियार मरहूम तामिल भाषा के प्रसिद्व कवि, पत्रकार, उपन्यासकार और पटकथा लेखक थें। उनका जन्म 16 मई 1935 को त्रिरूप्पर (तमिलनाडु) में हुआ। प्रारम्भिक षिक्षा कोयम्बटूर में हुई। वे नास्तिक थें, लेकिन विभिन्न धर्मो की पुस्तकें पढ़ते रहते थें। किसी पत्रकार और साहित्यकार को विभिन्न धर्मो के बारे में जानकारी रखनी पढ़ती हैं। जनाब अब्दुलाह अडियार अध्ययन के दौरान...

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